आद्य

Aadya

Ādya · IAST

प्रथम — आदि तत्त्व।

उभयमेष1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 11.31

    आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद । विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम् ॥

    ākhyāhi me ko bhavān ugra-rūpo namo'stu te deva-vara prasīda | vijñātum icchāmi bhavantam ādyaṁ na hi prajānāmi tava pravṛttim ||

    मुझे बताइए कि इस उग्र रूप वाले आप कौन हैं। हे देवताओं में श्रेष्ठ, आपको नमस्कार है, प्रसन्न हूजिए। मैं आदिपुरुष आपको जानना चाहता हूँ, क्योंकि आपकी लीला मैं समझ नहीं पा रहा हूँ।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/adya · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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