अम्बर

Ambara

Ambara · IAST

आकाश; तथा सुन्दर वस्त्र।

बालकमेष1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 9.6

    यथाकाशस्थितो नित्यं वायुः सर्वत्रगो महान् । तथा सर्वाणि भूतानि मत्स्थानीत्युपधारय ॥

    yathākāśa-sthito nityaṁ vāyuḥ sarvatra-go mahān | tathā sarvāṇi bhūtāni mat-sthānīty upadhāraya ||

    जैसे सर्वत्र बहने वाली विशाल वायु सदा आकाश में ही स्थित रहती है, वैसे ही सब प्राणी मुझमें स्थित हैं, ऐसा जान लो।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/ambara · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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