अमृत / अमृता
Amrita / Amritaa
Amṛta / Amṛtā · IAST
अमरता का अमृत; मृत्यु-रहित, अविनाशी।
बालक / बालिका1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 9.19
तपाम्यहमहं वर्षं निगृह्णाम्युत्सृजामि च । अमृतं चैव मृत्युश्च सदसच्चाहमर्जुन ॥
tapāmy aham ahaṃ varṣaṃ nigṛhṇāmy utsṛjāmi ca | amṛtaṃ caiva mṛtyuśca sadasaccāham arjuna ||
मैं सूर्यरूप से ताप देता हूँ; वर्षा को रोकता हूँ और बरसाता भी हूँ। हे अर्जुन, मैं अमृत और मृत्यु दोनों हूँ, और जो है तथा जो नहीं है, वह सब भी मैं ही हूँ।
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/amrita · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता