अनादि

Anaadi

Anādi · IAST

जिसका कोई आरम्भ नहीं; नित्य, सनातन।

उभयमेष1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 13.13

    ज्ञेयं यत्तत्प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वामृतमश्नुते । अनादिमत्परं ब्रह्म न सत्तन्नासदुच्यते ॥

    jñeyaṃ yat tat pravakṣyāmi yaj jñātvāmṛtam aśnute | anādimat paraṃ brahma na sat tan nāsad ucyate ||

    अब मैं उस जानने योग्य तत्त्व को बताता हूँ, जिसे जानकर मनुष्य अमरता पा लेता है। वह अनादि परब्रह्म न सत् कहा जाता है, न असत्।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/anadi · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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