अनन्त / अनन्ता

Ananta / Anantaa

Ananta / Anantā · IAST

जिसका कोई अन्त नहीं — असीम।

बालक / बालिकामेष1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 11.37

    कस्माच्च ते न नमेरन्महात्मन्गरीयसे ब्रह्मणोऽप्यादिकर्त्रे । अनन्त देवेश जगन्निवास त्वमक्षरं सदसत्तत्परं यत् ॥

    kasmācca te na nameranmahātman garīyase brahmaṇo'pyādikartre । ananta deveśa jagannivāsa tvamakṣaraṃ sadasattatparaṃ yat ॥

    हे महात्मन्, आप तो स्रष्टा ब्रह्मा से भी महान् और आदि-स्रष्टा हैं; फिर आपको सब प्रणाम क्यों न करें? हे अनन्त, हे देवेश, हे जगन्निवास, आप ही अक्षर हैं, और सत्-असत् से परे जो कुछ है वही आप हैं।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/ananta · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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