अनन्तवीर्य

Anantaveerya

Anantavīrya · IAST

असीम बल और पराक्रम वाला।

बालकमेष1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 11.40

    नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व । अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः ॥

    namaḥ purastād atha pṛṣṭhatas te namo 'stu te sarvata eva sarva । ananta-vīryāmita-vikramas tvaṃ sarvaṃ samāpnoṣi tato 'si sarvaḥ ॥

    आपको आगे से और पीछे से नमस्कार; सब ओर से आपको नमस्कार है, हे सर्वस्वरूप। अनन्त शक्ति और अपार पराक्रम वाले आप सब कुछ में व्याप्त हैं, इसलिए आप ही सर्वस्व हैं। (अर्जुन की श्रीकृष्ण-स्तुति)

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/anantavirya · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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