भाषा

Bhaashaa

Bhāṣā · IAST

वाणी, भाषा का वरदान।

बालिकाधनु1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 17.15

    अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत् । स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते ॥

    anudvega-karaṃ vākyaṃ satyaṃ priya-hitaṃ ca yat . svādhyāyābhyasanaṃ caiva vāṅmayaṃ tapa ucyate ..

    जो वाणी किसी को दुःख न दे, जो सच्ची, प्रिय और हितकारी हो, तथा स्वाध्याय का अभ्यास, इसे वाणी का तप कहा जाता है।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/bhasha · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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