भृगु
Bhrigu
Bhṛgu · IAST
महर्षि भृगु का नाम।
बालक1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 10.25
महर्षीणां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम् । यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि स्थावराणां हिमालयः ॥
maharṣīṇāṁ bhṛgur ahaṁ girām asmy ekam akṣaram | yajñānāṁ japa-yajño 'smi sthāvarāṇāṁ himālayaḥ ||
महर्षियों में मैं भृगु हूँ, और वाणी में मैं एक अक्षर ॐ हूँ। यज्ञों में मैं जप-यज्ञ हूँ, और स्थिर वस्तुओं में मैं हिमालय हूँ। [श्रीकृष्ण अपने श्रेष्ठ रूप बता रहे हैं]
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/bhrigu · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता