दीप

Deepa

Dīpa · IAST

दीपक; स्थिर भीतरी ज्योति।

बालकमीन1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 6.19

    यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता । योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः ॥

    yathā dīpo nivāta-stho neṅgate sopamā smṛtā . yogino yata-cittasya yuñjato yogam ātmanaḥ ..

    जैसे बिना हवा की जगह में रखा दीपक नहीं हिलता, वैसी ही उस योगी की स्थिति कही गई है जिसका मन वश में है और जो स्वयं से जुड़ने के अभ्यास में लीन है। [स्थिर मन की उपमा]

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/dipa · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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