दृक / दृक्साक्षी

Drik / Driksaakshee

Dṛk / Dṛksākṣī · IAST

द्रष्टा / साक्षी चेतना — माप या प्रमाण से परे (अर्थात् भगवान्)।

बालक / बालिकाकुम्भ1 शास्त्रीय सन्दर्भ

व्युत्पत्ति · व्युत्पत्ति

दृक् / दृक्साक्षी = दृक् (द्रष्टा, देखने वाला) + साक्षी (वह द्रष्टा जो स्वयं दृश्य से अलग या निर्लिप्त है)

दृक् शब्द का अर्थ है द्रष्टा या देखने वाला। साक्षी का अर्थ भी वैसा ही है, वह द्रष्टा जो स्वयं दृश्य से अलग या निर्लिप्त है। हमारे शास्त्रों की भाषा में या आम बोलचाल की भाषा में भी, देखने का अर्थ केवल आँखों से देखना नहीं है। जैसे हम किसी को कहते हैं 'देखिए क्या चल रहा है' — यहाँ देखने का अर्थ केवल देखने से नहीं है, समझने से है। अद्वैत वेदान्त की दृष्टि से दृक् और दृक्साक्षी उसी परमात्मा के दो समानार्थी नाम हैं।

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • दृग्-दृश्य विवेक · verse 1

    रूपं दृश्यं लोचनं दृक् तद्दृश्यं दृक्तु मानसम्। दृश्या धीवृत्तयः साक्षी दृगेव न तु दृश्यते॥

    rūpaṁ dṛśyaṁ locanaṁ dṛk taddṛśyaṁ dṛktu mānasam | dṛśyā dhīvṛttayaḥ sākṣī dṛgeva na tu dṛśyate ||

    रूप वह दृश्य है जिसे आँखें देख रही हैं, उन (आँखों) को देखने वाला मन है, मन की वृत्तियों को जो देख रहा है वह साक्षी है, वह केवल दृक् (द्रष्टा) है, वह दिखाई नहीं देता। (अर्थात् वह परमात्मा जो दिखाई नहीं देता, पर जो सब कुछ देखता है, जो सब कुछ जानता है।)

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/drik · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — दृग्-दृश्य विवेक

आपकी चयन सूची 0 / 10

आपकी सूची खाली है

किसी भी नाम पर बुकमार्क दबाकर अपने पसन्द के नाम जोड़िए।