गालव

Gaalava

Gālava · IAST

महान् ऋषि — विश्वामित्र के शिष्य। जयपुर स्थित गलता जी उनकी तपस्थली थी।

बालकमकर1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • महाभारत · Udyoga Parva 5.104.19

    विश्वामित्रस्तु शिष्यस्य गालवस्य तपस्विनः। शुश्रूषया च भक्त्या च प्रीतिमानित्युवाच तम्। अनुज्ञातो मया वत्स यथेष्टं गच्छ गालव॥

    viśvāmitrastu śiṣyasya gālavasya tapasvinaḥ | śuśrūṣayā ca bhaktyā ca prītimānityuvāca tam | anujñāto mayā vatsa yatheṣṭaṁ gaccha gālava ||

    विश्वामित्र ने अपने शिष्य तपस्वी गालव की सेवा और भक्ति से प्रसन्न होकर कहा — 'वत्स, मैंने तुम्हें अनुज्ञा दी है, जहाँ चाहो जाओ, हे गालव।'

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/galava · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — महाभारत

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