ह्री
Hree
Hrī · IAST
लज्जा — कोमल, शोभायुक्त संकोच का भाव।
बालिका1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 16.2
अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम् । दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् ॥
ahiṃsā satyam akrodhas tyāgaḥ śāntir apaiśunam . dayā bhūteṣv aloluptvaṃ mārdavaṃ hrīr acāpalam ..
अहिंसा, सत्य, क्रोध का अभाव, त्याग, शान्ति, चुगली न करना, प्राणियों पर दया, निर्लोभता, कोमलता (मार्दव), लज्जा (ह्री) और चञ्चलता का अभाव।
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/hri · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता