जनक

Janak

Janaka · IAST

ज्ञानी राजर्षि जनक; जनक, उत्पन्न करनेवाला।

बालकमकर1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 3.20

    कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः । लोकसङ्ग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि ॥

    karmaṇaiva hi saṁsiddhimāsthitā janakādayaḥ | lokasaṅgrahamevāpi sampaśyankartumarhasi ||

    राजा जनक आदि ने कर्म से ही सिद्धि पाई थी; इसलिए तुम्हें भी लोक के कल्याण को ध्यान में रखकर कर्म करना चाहिए। [कृष्ण अर्जुन को अपना कर्तव्य निभाने को कहते हैं]

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/janaka · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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