जनार्दन

Janaardana

Janārdana · IAST

श्रीकृष्ण, जो सब प्राणियों का पालन करते हैं।

बालकमकर1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 10.18

    विस्तरेणात्मनो योगं विभूतिं च जनार्दन । भूयः कथय तृप्तिर्हि शृण्वतो नास्ति मेऽमृतम् ॥

    vistareṇātmano yogaṃ vibhūtiṃ ca janārdana | bhūyaḥ kathaya tṛptir hi śṛṇvato nāsti me 'mṛtam ||

    हे जनार्दन [कृष्ण], अपनी दिव्य विभूति और योग का विस्तार से फिर बताइए। सुनते-सुनते मेरी तृप्ति नहीं होती; आपके वचन तो अमृत समान हैं।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/janardana · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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