कवि
Kavi
Kavi · IAST
सर्वज्ञ कवि एवं ज्ञानी द्रष्टा।
बालक1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 8.9
कविं पुराणमनुशासितारमणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः । सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूपमादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ॥
kaviṃ purāṇam-anuśāsitāram-aṇor-aṇīyāṃsam-anusmared-yaḥ | sarvasya dhātāram-acintya-rūpam-āditya-varṇaṃ tamasaḥ parastāt ||
जो उस सर्वज्ञ, सनातन, शासक, परमाणु से भी सूक्ष्म, सबके धारणकर्ता, अचिन्त्य रूप वाले, सूर्य के समान तेजस्वी और अन्धकार से परे परमात्मा का स्मरण करता है।
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/kavi · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता