क्रतु
Kratu
Kratu · IAST
पवित्र यज्ञ; सङ्कल्प और इच्छाशक्ति।
बालक1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 9.16
अहं क्रतुरहं यज्ञः स्वधाहमहमौषधम् । मन्त्रोऽहमहमेवाज्यमहमग्निरहं हुतम् ॥
ahaṁ kraturahaṁ yajñaḥ svadhāhamahamauṣadham | mantro'hamahamevājyamahamagnirahaṁ hutam ||
मैं ही यज्ञ हूँ, मैं ही भेण्ट हूँ, मैं ही औषधि और पवित्र मन्त्र हूँ; मैं ही घृत, अग्नि और अग्नि में दी गई आहुति हूँ। [कृष्ण स्वयं को हर पूजा-कर्म में व्याप्त बताते हैं]
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/kratu · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता