कृप / कृपी

Kripa / Kripee

Kṛpa / Kṛpī · IAST

कृप, महाभारत के पूज्य गुरु एवं अस्त्र-विद्या के आचार्य।

बालक / बालिकामिथुन1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 1.8

    भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः । अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥

    bhavān bhīṣmaśca karṇaśca kṛpaśca samitiñjayaḥ | aśvatthāmā vikarṇaśca saumadattis-tathaiva ca ||

    आप स्वयं, भीष्म, कर्ण और युद्ध में सदा विजयी कृप; अश्वत्थामा, विकर्ण और उसी प्रकार सोमदत्त के पुत्र (भूरिश्रवा) भी हैं।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/kripa · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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