कुसुमाकर
Kusumaakara
Kusumākara · IAST
वसन्त, वह ऋतु जब चारों ओर पुष्प खिलते हैं।
बालक1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 10.35
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् । मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥
bṛhat-sāma tathā sāmnāṃ gāyatrī chandasām aham | māsānāṃ mārga-śīrṣo 'ham ṛtūnāṃ kusumākaraḥ ||
गीतों में मैं बृहत्साम हूँ और छन्दों में गायत्री हूँ। महीनों में मैं मार्गशीर्ष (अगहन) हूँ और ऋतुओं में फूलों वाली वसन्त ऋतु हूँ।
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/kusumakara · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता