मैत्र

Maitra

Maitra · IAST

सब प्राणियों के प्रति मैत्री और सद्भाव से भरा हुआ।

बालक / बालिकासिंह1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 12.13

    अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च । निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥

    adveṣṭā sarvabhūtānāṃ maitraḥ karuṇa eva ca | nirmamo nirahaṅkāraḥ samaduḥkhasukhaḥ kṣamī ||

    वह किसी प्राणी से द्वेष नहीं करता, सबके प्रति मित्रवत् और दयालु है। 'मैं और मेरा' के भाव तथा अहङ्कार से रहित, सुख-दुःख में समान और क्षमाशील है।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/maitra · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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