मणि

Mani

Maṇi · IAST

मणि या मोती — एक अनमोल और चमकती हुई वस्तु।

उभयसिंह1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 7.7

    मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय । मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव ॥

    mattaḥ parataraṁ nānyat kiñcid asti dhanañjaya | mayi sarvam idaṁ protaṁ sūtre maṇi-gaṇā iva ||

    हे धनञ्जय, मुझसे श्रेष्ठ और कुछ भी नहीं है; यह सम्पूर्ण जगत् मुझमें उसी प्रकार पिरोया हुआ है जैसे धागे में मणियाँ। [श्रीकृष्ण के वचन; धनञ्जय = अर्जुन]

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/mani · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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