मरुत
Marut
Marut · IAST
वायु-देव; आकाश का दीप्तिमान्, वेगवान् प्राण।
बालक1 शास्त्रीय सन्दर्भ
व्युत्पत्ति · व्युत्पत्ति
मरुत् = हलन्त-लोप → मरुत
रूप मरुत् अन्त में हलन्त सहित लिखा जाता है (व्याकरणिक/उद्धरण वर्तनी); नाम रूप में अन्त्य हलन्त हटाकर मरुत लिखा जाता है, और अङ्ग्रेजी में अन्त्य अकार अनुच्चारित रहता है।
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 10.21
आदित्यानामहं विष्णुर्ज्योतिषां रविरंशुमान् । मरीचिर्मरुतामस्मि नक्षत्राणामहं शशी ॥
ādityānām ahaṁ viṣṇur jyotiṣāṁ ravir aṁśumān | marīcir marutām asmi nakṣatrāṇām ahaṁ śaśī ||
आदित्यों में मैं विष्णु हूँ, ज्योतियों में मैं किरणों वाला सूर्य हूँ। मरुतों (वायुओं) में मैं मरीचि हूँ, और नक्षत्रों में मैं चन्द्रमा हूँ।
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/marut · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता