प्रभा

Prabhaa

Prabhā · IAST

प्रकाश; आभा।

बालिकाकन्या1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 7.8

    रसोऽहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसूर्ययोः । प्रणवः सर्ववेदेषु शब्दः खे पौरुषं नृषु ॥

    raso'hamapsu kaunteya prabhāsmi śaśisūryayoḥ | praṇavaḥ sarvavedeṣu śabdaḥ khe pauruṣaṃ nṛṣu ||

    (श्रीकृष्ण अर्जुन से) मैं जल में रस हूँ, चन्द्रमा और सूर्य में प्रकाश हूँ, सब वेदों में ॐ हूँ, आकाश में शब्द हूँ और मनुष्यों में पौरुष हूँ।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/prabha · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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