प्रीति

Preeti

Prīti · IAST

स्नेहपूर्ण प्रेम और आनन्द।

बालिकाकन्या1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 10.10

    तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम् । ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते ॥

    teṣāṁ satata-yuktānāṁ bhajatāṁ prīti-pūrvakam | dadāmi buddhi-yogaṁ taṁ yena mām upayānti te ||

    जो सदा मुझसे जुड़े रहकर प्रेमपूर्वक मेरा भजन करते हैं, उन्हें मैं वह बुद्धि-योग देता हूँ जिससे वे मुझ तक पहुँचते हैं। [श्रीकृष्ण के वचन]

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/priti · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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