रवि
Ravi
Ravi · IAST
सूर्य।
बालक1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 13.34
यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः । क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत ॥
yathā prakāśayaty ekaḥ kṛtsnaṁ lokam imaṁ raviḥ | kṣetraṁ kṣetrī tathā kṛtsnaṁ prakāśayati bhārata ||
जैसे एक ही सूर्य इस सारे संसार को प्रकाशित करता है, वैसे ही क्षेत्र का ज्ञाता (आत्मा) सम्पूर्ण क्षेत्र को प्रकाशित करता है, हे भारत।
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/ravi · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता