समाधि

Samaadhi

Samādhi · IAST

गहन ध्यान-समाधि; एकाग्र और स्थिर हुए मन की परम शान्त अवस्था।

बालककुम्भ1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 4.24

    ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् । ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥

    brahmārpaṇaṁ brahma havir brahmāgnau brahmaṇā hutam, brahmaiva tena gantavyaṁ brahmakarmasamādhinā

    अर्पण ब्रह्म है, हवि ब्रह्म है, ब्रह्मरूपी अग्नि में ब्रह्म के द्वारा आहुति दी जाती है। जो ब्रह्मरूपी कर्म में लीन है, वह ब्रह्म को ही पाता है।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/samadhi · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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