समृद्ध

Samriddha

Samṛddha · IAST

समृद्ध, फलता-फूलता; वैभव से सम्पन्न।

बालककुम्भ1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 11.33

    तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रून्भुङ्क्ष्व राज्यं समृद्धम् । मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन् ॥

    tasmāttvamuttiṣṭha yaśo labhasva jitvā śatrūnbhuṅkṣva rājyaṃ samṛddham | mayaivaite nihatāḥ pūrvameva nimittamātraṃ bhava savyasācin ||

    इसलिए उठो और यश पाओ; शत्रुओं को जीतकर समृद्ध राज्य का भोग करो। ये सब पहले ही मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं। हे सव्यसाची (अर्जुन), तुम केवल निमित्त बन जाओ।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/samriddha · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

आपकी चयन सूची 0 / 10

आपकी सूची खाली है

किसी भी नाम पर बुकमार्क दबाकर अपने पसन्द के नाम जोड़िए।