संसिद्धि
Sansiddhi
Saṁsiddhi · IAST
पूर्ण सिद्धि, सर्वोच्च परिपूर्णता।
बालिका1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 18.45
स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः । स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु ॥
sve sve karmaṇy abhirataḥ saṃsiddhiṃ labhate naraḥ | svakarmanirataḥ siddhiṃ yathā vindati tac chṛṇu ||
अपने-अपने कर्म में लगा हुआ मनुष्य पूर्ण सिद्धि को प्राप्त कर लेता है। अपने कर्म में लगा हुआ मनुष्य जिस प्रकार सिद्धि पाता है, उसे सुनो।
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/samsiddhi · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता