समुद्र

Samudra

Samudra · IAST

समुद्र; जलों का विशाल, गम्भीर और शान्त भण्डार।

बालककुम्भ1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 2.70

    आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् । तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोति न कामकामी ॥

    āpūryamāṇam acalapratiṣṭhaṃ samudram āpaḥ praviśanti yadvat । tadvat kāmā yaṃ praviśanti sarve sa śāntim āpnoti na kāmakāmī ॥

    जैसे नदियों का जल समुद्र में समा जाता है, फिर भी समुद्र भरा और स्थिर रहता है, वैसे ही जिसमें सब इच्छाएँ आकर शान्त हो जाती हैं वही शान्ति पाता है, इच्छाओं के पीछे भागने वाला नहीं।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/samudra · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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