सत्त्व

Sattva

Sattva · IAST

अन्तःशक्ति और स्वभाव की शुद्धता।

बालककुम्भ1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 10.36

    द्यूतं छलयतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् । जयोऽस्मि व्यवसायोऽस्मि सत्त्वं सत्त्ववतामहम् ॥

    dyūtaṁ chalayatām asmi tejas tejasvinām aham | jayo 'smi vyavasāyo 'smi sattvaṁ sattvavatām aham ||

    छल करनेवालों में मैं जुआ हूँ, तेजस्वियों का तेज हूँ। मैं विजय हूँ, मैं दृढ़ प्रयत्न हूँ, और सज्जनों की सत्त्व-शक्ति हूँ। (श्रीकृष्ण अपनी सर्वव्यापकता बता रहे हैं)

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/sattva · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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