शान्ति

Shaanti

Śānti · IAST

हृदय और मन की गहरी, स्थायी शान्ति।

बालिकाकुम्भ1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 5.29

    भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् । सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥

    bhoktāraṃ yajñatapasāṃ sarvalokamaheśvaram | suhṛdaṃ sarvabhūtānāṃ jñātvā māṃ śāntim ṛcchati ||

    मुझे सब यज्ञों-तपों को ग्रहण करने वाला, सभी लोकों का स्वामी और सब प्राणियों का हितैषी मित्र जानकर मनुष्य शान्ति पा लेता है।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/shanti · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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