शुचि
Shuchi
Śuci · IAST
पवित्रता।
बालिका1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 12.16
अनपेक्षः शुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथः । सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्तः स मे प्रियः ॥
anapekṣaḥ śucir dakṣa udāsīno gata-vyathaḥ . sarvārambha-parityāgī yo mad-bhaktaḥ sa me priyaḥ ..
जो भक्त किसी वस्तु की चाह नहीं रखता, पवित्र और कुशल है, चिन्ता और दुःख से मुक्त है, तथा स्वार्थ भरे कामों को छोड़ चुका है, वही मुझे प्रिय है। [श्रीकृष्ण अपने प्रिय भक्त के विषय में]
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/shuchi · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता