स्थिर / स्थिरा

Sthira / Sthiraa

Sthira / Sthirā · IAST

स्थिर, दृढ़ एवं अविचल।

बालक / बालिकाकुम्भ1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 12.19

    तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येन केनचित् । अनिकेतः स्थिरमतिर्भक्तिमान्मे प्रियो नरः ॥

    tulya-nindā-stutir maunī santuṣṭo yena kenacit | aniketaḥ sthira-matir bhaktimān me priyo naraḥ ||

    जो निन्दा और स्तुति को समान मानता है, मौन रहता है, जो कुछ मिले उसी में सन्तुष्ट रहता है, जिसका कोई निश्चित घर नहीं और जिसकी बुद्धि स्थिर है, ऐसा भक्तिमान मनुष्य मुझे प्रिय है।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/sthira · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

आपकी चयन सूची 0 / 10

आपकी सूची खाली है

किसी भी नाम पर बुकमार्क दबाकर अपने पसन्द के नाम जोड़िए।