स्वस्ति

Svasti

Svasti · IAST

कल्याण और मङ्गल — 'सबका भला हो'।

बालिकाकुम्भ1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 11.21

    अमी हि त्वा सुरसङ्घा विशन्ति केचिद्भीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति । स्वस्तीत्युक्त्वा महर्षिसिद्धसङ्घाः स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्कलाभिः ॥

    amī hi tvā sura-saṅghā viśanti kecid bhītāḥ prāñjalayo gṛṇanti . svastīty uktvā maharṣi-siddha-saṅghāḥ stuvanti tvāṃ stutibhiḥ puṣkalābhiḥ ..

    ये देवताओं के समूह आप में प्रवेश कर रहे हैं; कुछ भयभीत होकर हाथ जोड़कर आपकी स्तुति करते हैं। 'कल्याण हो' कहकर महर्षियों और सिद्धों के समूह सुन्दर स्तुतियों से आपका गुणगान करते हैं।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/svasti · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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