तुष्टि

Tushti

Tuṣṭi · IAST

सन्तोष — मन की तृप्ति और प्रसन्नता।

बालिकातुला1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 10.5

    अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयशः । भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः ॥

    ahiṁsā samatā tuṣṭis tapo dānaṁ yaśo 'yaśaḥ . bhavanti bhāvā bhūtānāṁ matta eva pṛthag-vidhāḥ ..

    अहिंसा, समता, सन्तोष, तप, दान, यश और अपयश - प्राणियों के ये भिन्न-भिन्न भाव मुझसे ही उत्पन्न होते हैं।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/tushti · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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