उत्साह

Utsaaha

Utsāha · IAST

महान् उत्साह; उमंग और ऊर्जा।

बालकवृषभ1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 18.26

    मुक्तसङ्गोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितः । सिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते ॥

    mukta-saṅgo 'nahaṃvādī dhṛty-utsāha-samanvitaḥ | siddhy-asiddhyor nirvikāraḥ kartā sāttvika ucyate ||

    जो आसक्ति से मुक्त, अहङ्कार और बड़बोलेपन से रहित, धैर्य और उत्साह से भरा, तथा सफलता-असफलता में समान रहता है, वह सात्त्विक कर्ता कहलाता है।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/utsaha · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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