वैनतेय
Vainateya
Vainateya · IAST
गरुड, विनता के पुत्र, दिव्य पक्षिराज।
बालक1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 10.30
प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां कालः कलयतामहम् । मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम् ॥
prahlādaś cāsmi daityānāṃ kālaḥ kalayatām aham | mṛgāṇāṃ ca mṛgendro 'haṃ vainateyaś ca pakṣiṇām ||
दैत्यों में मैं प्रह्लाद हूँ और गिनने वालों में काल हूँ। पशुओं में मैं सिंह (मृगराज) हूँ और पक्षियों में गरुड़ (विनता-पुत्र वैनतेय) हूँ।
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/vainateya · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता