वसु
Vasu
Vasu · IAST
आठ वसुओं में से एक, तत्त्वों के देव; तथा 'उज्ज्वल, श्रेष्ठ' अर्थ भी।
बालक1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 10.23
रुद्राणां शङ्करश्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम् । वसूनां पावकश्चास्मि मेरुः शिखरिणामहम् ॥
rudrāṇāṃ śaṅkaraś cāsmi vitteśo yakṣa-rakṣasām | vasūnāṃ pāvakaś cāsmi meruḥ śikhariṇām aham ||
रुद्रों में मैं शङ्कर (शिव) हूँ और यक्ष-राक्षसों में धन के स्वामी कुबेर हूँ। वसुओं में मैं अग्नि हूँ और पर्वत-शिखरों में मेरु हूँ।
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/vasu · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता