वेद

Veda

Veda · IAST

पवित्र ज्ञान; सनातन धर्म के सर्वप्राचीन पावन ग्रन्थ।

बालकवृषभ1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 15.15

    सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च । वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यो वेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम् ॥

    sarvasya cāhaṃ hṛdi sanniviṣṭo mattaḥ smṛtir jñānam apohanaṃ ca | vedaiś ca sarvair aham eva vedyo vedāntakṛd vedavid eva cāham ||

    मैं सबके हृदय में बसा हुआ हूँ; मुझसे ही स्मृति, ज्ञान और उनका लोप होता है। समस्त वेदों के द्वारा जानने योग्य मैं ही हूँ; वेदान्त का रचयिता और वेदों को जाननेवाला भी मैं ही हूँ।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/veda · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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