विभूति
Vibhooti
Vibhūti · IAST
दिव्य ऐश्वर्य और वैभव, चमकता हुआ तेज।
उभय1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 10.41
यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा । तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंशसम्भवम् ॥
yad yad vibhūtimat sattvaṁ śrīmad ūrjitam eva vā | tat tad evāvagaccha tvaṁ mama tejo'ṁśasambhavam ||
जो भी वस्तु ऐश्वर्यशाली, सुन्दर अथवा बलशाली है, उसे तू मेरे तेज के एक अंश से उत्पन्न हुई जान।
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/vibhuti · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता