विश्वरूप
Vishvaroopa
Viśvarūpa · IAST
जिनका रूप ही सम्पूर्ण विश्व है।
बालक1 शास्त्रीय सन्दर्भ
शास्त्रीय सन्दर्भ
भगवद् गीता · 11.16
अनेकबाहूदरवक्त्रनेत्रं पश्यामि त्वां सर्वतोऽनन्तरूपम् । नान्तं न मध्यं न पुनस्तवादिं पश्यामि विश्वेश्वर विश्वरूप ॥
anekabāhūdaravaktranetraṃ paśyāmi tvāṃ sarvato'nantarūpam | nāntaṃ na madhyaṃ na punastavādiṃ paśyāmi viśveśvara viśvarūpa ||
हे विश्वेश्वर! मैं आपको अनेक भुजाओं, उदरों, मुखों और नेत्रों वाला तथा सब ओर से अनन्त रूप वाला देखता हूँ। हे विश्वरूप! मुझे आपका न अन्त दिखता है, न मध्य और न आदि।
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/vishvarupa · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता