योग

Yoga

Yoga · IAST

ईश्वर से मिलन; अटल और कुशल कर्म का मार्ग।

उभयधनु1 शास्त्रीय सन्दर्भ

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 2.48

    योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय । सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥

    yogasthaḥ kuru karmāṇi saṅgaṁ tyaktvā dhanañjaya | siddhyasiddhyoḥ samo bhūtvā samatvaṁ yoga ucyate ||

    हे धनञ्जय (अर्जुन)! आसक्ति छोड़कर स्थिर मन से अपना कर्म करो। सफलता और असफलता में समान बने रहो; मन की यही समता योग कहलाती है।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/yoga · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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