अक्षज / अक्षजा

Akshaja / Akshajaa

Akṣaja / Akṣajā · IAST

अक्षर से उत्पन्न — अर्थात् भगवान् की सन्तान, अनन्त का बालक।

बालक / बालिकामेष

व्युत्पत्ति · व्युत्पत्ति

अक्षज = अक्षर (अविनाशी) + ज / जा (उत्पन्न, जनन / जायते)

यदि एक क्षण विचार करें, संसार में ऐसा क्या है जो क्षय नहीं होता? सीमित कुछ भी क्षय होता है — जीव, पर्वत, सूर्य और सौर-मण्डल का भी जीवन-काल है। जो क्षय नहीं होता वही भगवान् (अक्षर) हैं। और उस अक्षर की सन्तान है अक्षज / अक्षजा। संस्कृत में 'ज / जा' प्रत्यय 'उत्पन्न' का सूचक है (जनन / जायते से)। जैसे जल या पङ्क में उत्पन्न कमल को 'नीरज / नीरजा' (नीर = जल) या 'पङ्कज / पङ्कजा' (पङ्क = कीचड़) कहा जाता है। उसी प्रकार अक्षज का अर्थ है अक्षर से उत्पन्न — अनन्त की सन्तान।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/akshaja · CC BY-SA 4.0

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