अक्षर / अक्षरा

Akshara / Aksharaa

Akṣara / Akṣarā · IAST

जो क्षयरहित है (अर्थात् भगवान्)।

बालक / बालिकामेष

व्युत्पत्ति · व्युत्पत्ति

अक्षर = अ (निषेध) + क्षर (क्षय, नाशवान्)

क्षर का अर्थ है क्षय; अतः अक्षर वह है जो क्षय नहीं होता। यदि एक क्षण विचार करें — संसार में ऐसा क्या है जो क्षय नहीं होता? हम देख सकते हैं कि जो भी सीमित है, वह क्षय होता है। जीव-जन्तु क्षय होते हैं; विशाल भवन और पर्वत भी क्षय होते हैं। हमारे सूर्य, सौर-मण्डल और आकाश-गङ्गा का भी एक जीवन-काल है। तो ऐसा क्या है जो क्षय नहीं होता? वही भगवान् हैं।

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/akshara · CC BY-SA 4.0

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