सुकृत / सुकृति

Sukrit / Sukriti

Sukṛt / Sukṛti · IAST

सुकर्म करने वाला तथा सुकर्म; पुण्य, सत्कर्म।

बालक / बालिकाकुम्भ1 शास्त्रीय सन्दर्भ

व्युत्पत्ति · व्युत्पत्ति

सुकृत् = हलन्त-लोप → सुकृत

रूप सुकृत् अन्त में हलन्त सहित लिखा जाता है (व्याकरणिक/उद्धरण वर्तनी); नाम रूप में अन्त्य हलन्त हटाकर सुकृत लिखा जाता है, और अङ्ग्रेजी में अन्त्य अकार अनुच्चारित रहता है।

शास्त्रीय सन्दर्भ

  • भगवद् गीता · 7.16

    चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनोऽर्जुन । आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ ॥

    caturvidhā bhajante māṁ janāḥ sukṛtino 'rjuna | ārto jijñāsur arthārthī jñānī ca bharatarṣabha ||

    हे अर्जुन, चार प्रकार के पुण्यशील लोग मेरी भक्ति करते हैं: दुःखी, जिज्ञासु, धन या लाभ चाहने वाला, और ज्ञानी। [श्रीकृष्ण अर्जुन से]

स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/sukrit · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — भगवद् गीता

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