विपश्चित / विपश्चिता
Vipashchit / Vipashchitaa
Vipaścit / Vipaścitā · IAST
जिसने सत्य का दर्शन किया है — आत्मसाक्षात्कारी, प्रबुद्ध सन्त।
व्युत्पत्ति · व्युत्पत्ति
विपश्चित् = हलन्त-लोप → विपश्चित
रूप विपश्चित् अन्त में हलन्त सहित लिखा जाता है (व्याकरणिक/उद्धरण वर्तनी); नाम रूप में अन्त्य हलन्त हटाकर विपश्चित लिखा जाता है, और अङ्ग्रेजी में अन्त्य अकार अनुच्चारित रहता है।
शास्त्रीय सन्दर्भ
विवेकचूडामणि · verse 224
विशोक आनन्दघनो विपश्चित् स्वयं कुतश्चिन्न बिभेति कश्चित्। नान्योऽस्ति पन्था भवबन्धमुक्तेर्विना स्वतत्त्वावगमं मुमुक्षोः॥
viśoka ānandaghano vipaścit svayaṁ kutaścinna bibheti kaścit | nānyo'sti panthā bhavabandhamukter vinā svatattvāvagamaṁ mumukṣoḥ ||
शङ्कराचार्य — 'प्रबुद्ध (विपश्चित्) सदा हर्ष-शोक से रहित, आनन्द-घन, और संसार में किसी से नहीं डरते। मुमुक्षु के लिए संसार-बन्धन से मुक्ति का स्वयं के स्वरूप के साक्षात्कार के अतिरिक्त कोई दूसरा मार्ग नहीं है।'
स्रोत: akshara-pravaaha.com/naamaavali/vipashchit · CC BY-SA 4.0 · सन्दर्भ — विवेकचूडामणि